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रविवार, 29 अगस्त 2021

अपनी बोलियों के लिए 2

अगस्त 29, 2021 0
दिव्‍य हिमाचल में प्रकाशित लेख दूसरा व अंतिम हिस्‍सा  प्रकाशन दिनांक  8 अगस्‍त 2021  इसी तरह अंग्रेजी हम छोड़ नहीं सकते हैं और अपनी मांबोलियों का क्‍या किया जाए समझ नहीं आता है। हमारा शिक्षा-कारोबार सारा कार्य व्‍यापार सब अंग्रेजी में चलता आ रहा है। साल में एक दिन भाषा दिवस मना कर लेखकों आदि को पुरस्‍कार पकड़ा दिया जाता है। अपनी भाषा का झंडा उठा कर जय बोल दी, मेरी मां महान है का नारा लगा दिया। हो गया। उस बहू का तो पता नहीं पर अंग्रेजी...

गुरुवार, 26 अगस्त 2021

अपनी बोलियों के लिए

अगस्त 26, 2021 0
दिव्‍य हिमाचल में प्रकाशित लेख पहला हिस्‍सा  प्रकाशन दिनांक  1 अगस्‍त 2021 अपनी बोलियों के लिए   पहल में छपे एक लेख के अनुसार 70 साल में हलाक हुई 300 जुबानें एक सौ छियानबे  बोलियों निशाने पर हैं। सच में यह बहुत बड़ा सांस्‍कृतिक संकट है। दिन पर दिन छोटी होती जा रही इस दुनिया में हमारे लिए अपनी मां बोलियों की भाषाई विरासत को सहेजना मुश्किल होता जा रहा है।  पिछली सदी तक हम सबके पास अपनी-अपनी अलग स्‍वतंत्र दुनियां होतीं थी...

मंगलवार, 18 मई 2021

ऑक्सीजन पर प्रशासन

मई 18, 2021 0
इंदौर समाचार में प्रकाशित व्‍यंग्‍य दिनांक 17 मई 2021 इन दिनों हम सब उस वायु को ढूंढ रहे हैं, जिसमें हमारे प्राणों ने पहली सांस ली थी। इस प्राणवायु को डॉक्टरी भाषा में ऑक्सीजन कहा जाता है। आम जन इसे गैस कहते हैं।आज हमारा सारा प्रशासन गैस पर है, पता नहीं कब सांस की डोर टूट जाए। प्रशासन की नहीं, जनता की सांस टूटने की बात हो रही है। प्रशासन तो अमर होता है। अक्‍सर उसके फेफड़ों को ठेकेदारों और दलालों की प्राणवायु पर ज्‍यादा निर्भर पाया जाता है। वैसे...

रविवार, 25 अप्रैल 2021

सफाई चिंतन चालू है।

अप्रैल 25, 2021 0
 अक्षर विश्व उज्जैन में प्रकाशित व्यंग्य दिनांक 19 अप्रैल 2021सफाई चिंतन चालू है। हम दुनिया के सबसे महान सफाई पसंद लोग हैं और कोई भी सफाई के मामले में हमारा मुकाबला नहीं कर सकता है। हम किसी तराजू पर तोले नहीं जा सकते हैं क्‍योंकि हम महान हैं। हम सफाई को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं और एक क्षण भी कचरा या गंदगी सहन नहीं कर सकते हैं। जैसे ही हमें घर के अंदर कचरे का छोटा सा अंश भी दिखता है, हम तुरंत उसे खिड़की, बाल्‍कनी, दरवाजा से फेंक कर बाहर का रास्‍ता दिखा...

कोराना मतलब फीकी चाय में डुबोया मीठा बिस्किट

अप्रैल 25, 2021 0
  इंदौर समाचार में प्रकाशित व्यंग्य दिनांक 7 अप्रैल 2021कोराना मतलब फीकी चाय में डुबोया मीठा बिस्किटकोरोना ने सारी दुनिया की चलती गाड़ी में ब्रेक लगा दिया है। इस सहमी, ठहरी और व्‍याकुल सी दुनिया को सूझ ही नहीं पड़ रही है। घर के अंदर रह नहीं सकते, भूखे मर जाएंगे। बाहर निकल नहीं सकते, कोरोना मार जाएगा! इस भूख और रोटी के बीच नौकरी वाले, सब्‍जी वाले, राशन वाले, दूध वाले, दवा-दारू वाले और न जाने क्‍या-क्‍या वाले लोग आते हैं। सब एक दूसरे के बिना अपना पेट...

शनिवार, 17 अप्रैल 2021

नेताओं से परेशान लोग

अप्रैल 17, 2021 0
इंदौर समाचार में प्रकाशित व्यंग्यदिनांक 6 फरवरी 2021  यूं तो लोग बहुत सी बातों से दुखी हैं परंतु इस सूची में नेताओं का नंबर पहला आता है। लोग नेताओं से इतने ज्‍यादा दुखी हैं कि उनकी सारी ऊर्जा नेताओं को गालियां देने में ही खर्च हो जाती है। यह गुस्सा भीतर एक लावे की तरह सुलगता रहता है। बंदे को बस छूने की देर होती है और व‍ह बम की तरह फट पड़ता है। इन बमों के फटने से नेताओं का तो कुछ नहीं बिगड़ता है पर लोग रक्तचाप और मधुमेह के मरीज बनते जा रहे हैं। दुनिया...

बुधवार, 7 अप्रैल 2021

2020: एक आखिरी प्रेम कथा

अप्रैल 07, 2021 0
 व्यंग्य:2020: एक आखिरी प्रेम कथाएक कह रहा है, “मैं प्यार करता हूं”दूसरा कह रहा है, “प्यार करता है तो लिख कर दे”।  पहला कह रहा है, “मैं कह रहा हूं, क्या इतना काफी नहीं है? हमारे यहां प्यार करने की परंपरा है लिख कर देने की नहीं। आज तक किसी ने लिख कर नहीं दिया। क्या शीरी ने फरहाद को लिखकर दिया था? क्या मजनू ने लैला को, पुन्नू ने सस्‍सी को, महिवाल ने सोहनी को लिख कर दिया था? तुम समझ नहीं रहे हो। सारी दुनिया प्यार की दुश्मन होती है। लिख कर देने...